Thursday, 23 April 2020

माँ के आंसू

जिसने छुपाए रखे
हमेशा
अपने आँसुओं को,
वो माँ भी
आज रो पड़ी,
उसके इन आँसुओं में
कितना रुदन था
जाने वर्षों के दुःखों का
सेलाब था,
वो टूट चुकी थी
जो हरदम मेरे घर से
विदा लेते वक़्त
थामे रखी
अपने आँसुओं को
आज न थाम सकी
ये माँ भी ना
कब तक झेलते रहेगी
दुःख
बिना किसी प्रतिकार के !!

द्वारा - नीरज 'थिंकर' 

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